अंडरपास में गुजार रहे दिन, न मिल रही रहने को जगह न हो पा रहा इलाज

कोरोना वायरस के खतरे के बीच कई लोग ऐसे भी हैं, जो दिल्ली के एम्स अस्पताल के पास बने अंडरपास मेंं अपना समय गुजार रहे हैं। इन लोगों को न तो कहीं रहने का ठिकाना मिला और न ही रैन बसेरों में जगह।


यह सैकड़ों लोग देश के अलग-अलग राज्यों से उपचार की विशेष सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए एम्स अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान यहीं फंसे रह गए। इन लोगों को अब कोरोना के प्रकोप के खत्म होने का इंतजार है। जिससे यह अपना इलाज करा के घर लौट सकें।

दरअसल, कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण एम्स अस्पताल में ओपीडी बंद कर दी थी। इस अस्पताल में ये लोग किडनी और हृदय संबंधी रोगों एवं अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आए थे, लेकिन एम्स में इस समय कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है।

ऐसे में इन लोगों का इलाज नहीं हो पा रहा है और लॉकडाउन के कारण यह लोग अपने घर भी नहीं जा पा रहे हैं। अब ये लोग एम्स के पास बने अंडरपास में ही रह रहे हैं। इन लोगों को आसपास के रैनबसेरों में भी जगह नहीं मिली। इनके लिए अंडरपास में ही रैनबसेरा बना दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दिल्ली सरकार ने पर्याप्त शेल्टर होम की व्यवस्था नहीं है?